Saturday, 25 January 2025

मैं और मेरा लेखन

 


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#इन्दु_बाला_सिंह 


मेरे प्री प्रोफेशनल  ( बी एस सी के फर्स्ट ईयर)  के एग्जामिनेशन के बाद  मेरे पिता का ट्रांसफ़र माईन्स एरिया पुरना पानी में ट्रांसफ़र हो गया ।  


हम सब खुश थे पिता हेडमास्टर बन गये थे । हम अब टू बेडरूम वाले घर में रह रहे थे । पर माईन्स एरिया में कॉलेज नहीं था । छोटी सी जगह थी वह मात्र एक हाई स्कूल , दो चार दुकानें , एक पोस्ट ऑफिस और एक छोटा प्राथमिक चिकित्सालय था वहाँ । हर चीजों के लिये हम राउरकेला शहर पर निर्भर थे ।


समस्या मेरी पढ़ाई को ले के थी । मुझे कॉलेज की पढ़ाई के लिये हॉस्टल में रहना पड़ा । मेरे शरीर  को हॉस्टल का ख़ाना न लगा । मैं बीमार पड़ती रही ।


ग्रेजुएशन के बाद ब्याह हुआ तो जमशेदपुर पहुँची । सोची हिन्दी जगत से जुड़ूँगी ।


पर भाग्य को मंज़ूर न था ।


लेखन मेरे लिये तिलिस्म हो गया ।


लिखती रही और लेखन फाड़ती रही ।


दो कहानी संग्रह और दो उपन्यास फाड़े मैंने ।


पर मोह न छूटा लेखन से ।


बरस दर बरस गुजरते गये ।


फ़ेसबुक आया  और मैं फिर संजोने लगी लेखन ।


21/10/24



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