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#इन्दु_बाला_सिंह
मेरे प्री प्रोफेशनल ( बी एस सी के फर्स्ट ईयर) के एग्जामिनेशन के बाद मेरे पिता का ट्रांसफ़र माईन्स एरिया पुरना पानी में ट्रांसफ़र हो गया ।
हम सब खुश थे पिता हेडमास्टर बन गये थे । हम अब टू बेडरूम वाले घर में रह रहे थे । पर माईन्स एरिया में कॉलेज नहीं था । छोटी सी जगह थी वह मात्र एक हाई स्कूल , दो चार दुकानें , एक पोस्ट ऑफिस और एक छोटा प्राथमिक चिकित्सालय था वहाँ । हर चीजों के लिये हम राउरकेला शहर पर निर्भर थे ।
समस्या मेरी पढ़ाई को ले के थी । मुझे कॉलेज की पढ़ाई के लिये हॉस्टल में रहना पड़ा । मेरे शरीर को हॉस्टल का ख़ाना न लगा । मैं बीमार पड़ती रही ।
ग्रेजुएशन के बाद ब्याह हुआ तो जमशेदपुर पहुँची । सोची हिन्दी जगत से जुड़ूँगी ।
पर भाग्य को मंज़ूर न था ।
लेखन मेरे लिये तिलिस्म हो गया ।
लिखती रही और लेखन फाड़ती रही ।
दो कहानी संग्रह और दो उपन्यास फाड़े मैंने ।
पर मोह न छूटा लेखन से ।
बरस दर बरस गुजरते गये ।
फ़ेसबुक आया और मैं फिर संजोने लगी लेखन ।
21/10/24
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