इकतीस अक्तूबर सन चौरासी के दिन मैं स्कूल से घर पैदल लौटी । मैं स्कूल पढ़ने के लिए पैदल ही जाती थी और लौटती भी थी । मेरे घर से स्कूल की दूरी पैदल चलने से पंद्रह मिनट की ही थी ।
घर पहुंचने पर मेरे पिता ने कहा कि इंदिरा गांधी को उनके सिक्योरिटी गार्ड ने मार दिया है ।
हमारे घर में टी ० वी ० नहीं थी उस समय ।
हमारे घर के पास वाले ने नई टी ० वी० खरीदी थी उस समय । उनके ड्राइंग रूम का दरवाजा खुला रहता था । जिसको जब मौका मिले उनके घर जा कर इंदिरा गांधी का पार्थिव शरीर के दर्शन करता था ।
No comments:
Post a Comment