Thursday, 12 June 2025

लिफ्ट में अनाउंसमेंट



बारहवें तल्ले से मैं लिफ्ट नंबर 2 में चढ़ी एक मिनट में ही लिफ्ट में कुछ अनाउंसमेंट करने लगा ।
मुझे कुछ समझ में ही न आया । मैं डर के लिफ्ट देख रही थी । पर लिफ्ट चलती जा रही थी ।

लिफ्ट सीधे ग्राउंड फ्लोर में रुकी । मैं निकली तभी एक हॉकर अपनी पीठ पर पच्चीस किलो चावल की बोरी ले के घुसने लगा लिफ्ट में ।

मैने कहा - लिफ्ट में कुछ बोल रहा है । 

वह हॉकर डर के बाहर निकल गया ।

मैने उस हॉकर से सिक्योरिटी को कंप्लेन करने कहा ।

उस हॉकर ने कहा अभी अभी तो सिक्योरिटी गार्ड दौड़ का अंदर ऑफिस की तरफ भागा है ।

लिफ्ट नंबर 2 बंद ही नहीं हो रही थी ।

कुछ लोग कहने लगे लिफ्ट के पास कोई दिया जलाया होगा या धूपबत्ती रखा होगा ।

यह बिगड़ी लिफ्ट में मेरा दूसरा अनुभव था ।

अब तो मैं लिफ्ट में  हर समय चौकन्नी रहती हूं ।

फिर खुद पर हंसती हूं । मेरे चौकन्नी रहने से जैसे बिगड़े लिफ्ट की समस्या जैसे ठीक हो जाएगी ।

दूरदर्शन और इंदिरा गांधी

इकतीस अक्तूबर सन चौरासी के दिन मैं  स्कूल से घर पैदल लौटी । मैं स्कूल पढ़ने के लिए पैदल ही जाती थी और लौटती भी थी । मेरे घर से स्कूल की दूरी पैदल चलने से पंद्रह मिनट की ही थी ।

घर पहुंचने पर मेरे  पिता ने कहा कि इंदिरा गांधी को उनके सिक्योरिटी गार्ड ने मार दिया है ।

हमारे घर में टी ० वी ० नहीं थी उस समय ।

हमारे घर के पास वाले ने नई टी ० वी० खरीदी थी उस समय । उनके ड्राइंग रूम का दरवाजा खुला रहता था । जिसको जब मौका मिले उनके घर जा कर इंदिरा गांधी का पार्थिव शरीर के दर्शन करता था ।

अभ्यास पुस्तिका का अंत

मेरे पिता अमर नाथ सिंह ने हिंदी व्याकरण की अभ्यास पुस्तिका लिखी थी नवीं और दसवीं कक्षा के लिये। वे इस्पात इंग्लिश मीडियम स्कूल, राउरकेला के ...